जय अम्बे गौरी आरती: बोल, अर्थ और पूजा विधि
ॐ जय अम्बे गौरी आरती के पूरे बोल, सरल हिंदी अर्थ, पूजा विधि, दीपक के नियम और आम गलतियाँ जानें। घर पर भक्तिभाव से पाठ करने की आसान मार्गदर्शिका पढ़ें और आज शुरू करें।
Sanatan Marg
ॐ जय अम्बे गौरी आरती के पूरे बोल क्या हैं?
ॐ जय अम्बे गौरी आरती के प्रचलित पूरे बोल नीचे दिए गए हैं। यह माँ अम्बे या माँ दुर्गा की आरती है, जिसे आप सुबह, शाम, नवरात्रि या अपनी दैनिक पूजा के समय श्रद्धा से गा सकते हैं।
अलग-अलग पुस्तकों और परिवारों में कुछ शब्दों का उच्चारण या वर्तनी थोड़ी अलग मिल सकती है। नीचे सामान्य रूप से गाया जाने वाला पाठ दिया गया है।
ॐ जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।
तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥
माँग सिंदूर विराजत, टीको मृगमद को।
उज्ज्वल से दोउ नैना, चन्द्रवदन नीको॥
कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजै।
रक्तपुष्प गल माला, कंठन पर साजै॥
केहरि वाहन राजत, खड्ग कृपाण धारी।
सुर नर मुनिजन सेवत, तिनके दुखहारी॥
कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती।
कोटिक चन्द्र दिवाकर, सम राजत ज्योती॥
शुम्भ निशुम्भ बिडारे, महिषासुर घाती।
धूम्र विलोचन नैना, निशदिन मदमाती॥
चण्ड मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे।
मधु कैटभ दोउ मारे, सुर भयहीन करे॥
ब्रह्माणी रुद्राणी, तुम कमला रानी।
आगम निगम बखानी, तुम शिव पटरानी॥
चौंसठ योगिनी मंगल, गावत नृत्य करत भैरव।
बाजत ताल मृदंगा, अरु बाजत डमरू॥
तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता।
भक्तन की दुख हरता, सुख संपत्ति करता॥
भुजा चार अति शोभित, वर मुद्रा धारी।
मनवांछित फल पावत, सेवत नर नारी॥
कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती।
श्रीमालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योती॥
श्री अम्बेजी की आरती, जो कोई नर गावै।
कहत शिवानन्द स्वामी, सुख सम्पत्ति पावै॥
इस आरती का सरल हिंदी अर्थ क्या है?
आरती की शुरुआत माँ अम्बे को प्रणाम करने और उनके ध्यान से होती है। भक्त कहते हैं कि देवी का ध्यान देवता भी करते हैं। इसके बाद आरती में माँ के रूप, आभूषण, लाल वस्त्र, मस्तक के तिलक और उज्ज्वल नेत्रों का सुंदर वर्णन आता है।
माँ का सिंह पर सवार रूप शक्ति और निर्भयता का प्रतीक है। उनके हाथों में धारण किए गए अस्त्र यह भाव देते हैं कि देवी अन्याय, भय और बुराई से रक्षा करती हैं। शुम्भ, निशुम्भ, महिषासुर, चण्ड-मुण्ड और अन्य असुरों का वर्णन देवी की उस शक्ति को दिखाता है जो अधर्म और अहंकार का नाश करती है।
आरती के अगले पदों में माँ को ब्रह्माणी, रुद्राणी और कमला जैसे दिव्य रूपों से जोड़ा गया है। इसका भाव यह है कि देवी शक्ति सृष्टि, पालन, ज्ञान, समृद्धि और परिवर्तन के कई रूपों में प्रकट होती है। भक्त के लिए माँ केवल युद्ध करने वाली शक्ति नहीं, बल्कि करुणामयी जगदम्बा भी हैं।
अंतिम पदों में भक्त माँ से दुख दूर करने, सुख देने और मन को सही दिशा देने की प्रार्थना करता है। कंचन थाल, कपूर और ज्योति से आरती उतारना अपने अहंकार और अज्ञान को प्रकाश के सामने समर्पित करने का भाव है।
| आरती का भाग | मुख्य भाव | सरल समझ |
|---|---|---|
| माँ का ध्यान | देवी को नमन | पूजा की शुरुआत श्रद्धा से करना |
| रूप और आभूषण | माँ की दिव्य शोभा | सुंदरता में शक्ति और पवित्रता देखना |
| सिंह और अस्त्र | रक्षा और साहस | भय तथा बुराई का सामना करना |
| असुर-वध | अधर्म का अंत | अपने भीतर के क्रोध और अहंकार को घटाना |
| चार भुजाएँ और वर मुद्रा | कृपा और संरक्षण | सही कर्म के लिए शक्ति माँगना |
| दीपक और कपूर | प्रकाश का समर्पण | मन में ज्ञान और शांति जगाना |
घर पर यह आरती करने की सरल विधि क्या है?
आरती के लिए बहुत बड़ी तैयारी जरूरी नहीं है। साफ स्थान, एक दीपक और सच्ची श्रद्धा पर्याप्त हैं। पूजा की वस्तुएँ आपकी सुविधा और घर की परंपरा के अनुसार हो सकती हैं।
1. पूजा की तैयारी करें
पूजा का स्थान साफ करें और माँ दुर्गा या अम्बे का चित्र या विग्रह रखें। एक दीपक, धूप, फूल, अक्षत, जल और प्रसाद रख सकते हैं। यदि इनमें से कोई वस्तु उपलब्ध न हो, तो केवल हाथ जोड़कर भी आरती की जा सकती है।
पूजा से पहले हाथ-मुँह धो लें और कुछ क्षण शांत बैठें। मन को जल्दबाजी से हटाकर माँ का स्मरण करें।
2. दीपक जलाकर आरती गाएँ
दीपक में घी या तेल डालकर उसे स्थिर स्थान पर रखें। पहले छोटी प्रार्थना करें, फिर ॐ जय अम्बे गौरी के बोल साफ आवाज में गाएँ। गीत की गति ऐसी रखें कि घर के दूसरे लोग भी साथ जुड़ सकें।
आरती की थाली को देवी के सामने घड़ी की दिशा में धीरे-धीरे घुमाएँ। बहुत तेज घुमाने की जरूरत नहीं है। परिवार में कोई व्यक्ति आरती गा सकता है और बाकी लोग ताली या घंटी के साथ शामिल हो सकते हैं।
3. प्रार्थना और प्रसाद करें
आरती पूरी होने पर दीपक को सभी भक्तों के पास ले जाएँ। लोग दोनों हाथों से ज्योति की ऊष्मा लेकर माथे से लगा सकते हैं। इसके बाद माँ को प्रणाम करें और प्रसाद बाँटें। अपनी प्रार्थना में केवल इच्छा ही नहीं, विवेक, धैर्य और अच्छे कर्म की शक्ति भी माँगें।
दैनिक पूजा का पूरा क्रम जानने के लिए घर पर सुबह की पूजा कैसे करें? सरल दैनिक विधि भी पढ़ सकते हैं।
आरती के समय किन बातों का ध्यान रखें?
भक्ति में दिखावे से अधिक मन की सच्चाई का महत्व है। फिर भी कुछ छोटी सावधानियाँ आरती को सुरक्षित और सहज बनाती हैं।
- बोलों को समझकर और साफ उच्चारण के साथ गाने की कोशिश करें।
- आरती की थाली में कपूर बहुत अधिक न रखें।
- जलते दीपक या कपूर को बच्चों और कपड़ों से दूर रखें।
- आरती की लौ को अकेला छोड़कर कमरे से बाहर न जाएँ।
- गर्म थाली या दीपक को सीधे हाथ से न छुएँ।
- पूजा समाप्त होने पर दीपक को सुरक्षित स्थान पर रखें।
- किसी दूसरे व्यक्ति के उच्चारण या पूजा-पद्धति का मजाक न बनाएँ।
आम उच्चारण की गलतियाँ
अम्बे, गौरी, ज्योति, कृपाण और महिषासुर जैसे शब्दों को जल्दबाजी में बोलने से उच्चारण बिगड़ सकता है। पहले एक-एक पंक्ति पढ़ें, फिर उसी लय में गाएँ। यदि आपके घर में किसी पद का अलग पारंपरिक पाठ चलता है, तो उसे सम्मान के साथ अपनाया जा सकता है।
आरती का उद्देश्य केवल शब्द जल्दी पूरा करना नहीं है। अर्थ को ध्यान में रखकर गाने से मन पूजा में अधिक जुड़ता है। सही शब्द सीखना अच्छा है, लेकिन छोटी भूल के कारण श्रद्धा और प्रार्थना को न छोड़ें।
यह आरती कब गाई जाती है और बोल कैसे याद करें?
ॐ जय अम्बे गौरी आरती आम तौर पर सुबह या शाम की पूजा में गाई जाती है। नवरात्रि, दुर्गा पूजा, देवी मंदिर के कार्यक्रम और शुक्रवार की पारिवारिक पूजा में भी कई भक्त इसका पाठ करते हैं। इसके लिए कोई एक ही अनिवार्य समय नहीं है; आपके घर की परंपरा और सुविधा सबसे उपयोगी मार्गदर्शक हैं।
बोल याद करने के लिए रोज एक या दो पद पढ़ें। पहले मुखड़ा याद करें, फिर हर दिन एक अंतरा जोड़ें। अर्थ समझकर गाने से पंक्तियाँ अधिक आसानी से याद रहती हैं। मोबाइल पर पाठ पढ़ते समय स्क्रीन की रोशनी कम रखें और पूजा के बीच अनावश्यक संदेशों से ध्यान न भटकने दें।
पाठ साथ रखने के लिए निःशुल्क Sanatan Marg ऐप उपयोगी है; इसे Google Play से प्राप्त किया जा सकता है। देवी-पूजा के साथ दूसरी आरती पढ़ना चाहें, तो जय गणेश जय गणेश देवा: आरती के बोल और अर्थ भी देख सकते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या ॐ जय अम्बे गौरी आरती नवरात्रि में ही गाई जाती है?
नहीं, इसे नवरात्रि के साथ-साथ दैनिक पूजा, शाम की आरती और देवी के विशेष पर्वों पर भी गाया जा सकता है। समय और अवसर आपके परिवार की परंपरा तथा सुविधा पर निर्भर करते हैं।
क्या आरती सुबह करें या शाम को?
आरती सुबह और शाम दोनों समय की जा सकती है। जिस समय आपका मन शांत हो और आप नियमित रूप से पूजा कर सकें, वही समय आपके लिए अच्छा है।
क्या आरती के बोलों में अलग-अलग पाठ मिलते हैं?
हाँ, अलग-अलग पुस्तकों, क्षेत्रों और परिवारों में कुछ शब्द या पंक्तियाँ थोड़ी अलग मिल सकती हैं। मुख्य भाव माँ अम्बे की स्तुति, रक्षा और कृपा की प्रार्थना ही रहता है।
आरती के लिए कौन-सी सामग्री आवश्यक है?
एक दीपक और श्रद्धा सबसे जरूरी हैं; धूप, फूल, जल और प्रसाद उपलब्ध हों तो जोड़े जा सकते हैं। किसी सामग्री के न होने पर केवल स्वच्छ मन से आरती और प्रार्थना करना भी पर्याप्त है।
