जय अंबे गौरी आरती: लिखित बोल और पूजा विधि
पूजा एवं अनुष्ठान

जय अंबे गौरी आरती: लिखित बोल और पूजा विधि

जय अंबे गौरी आरती के लिखित बोल, सरल भावार्थ, घर पर आरती की विधि, सही समय और पाठ के सामान्य भेद जानें। श्रद्धा से पाठ करने की सरल मार्गदर्शिका और पूजा का भाव समझें।

S

Sanatan Marg

·8 मिनट पढ़ें
#जय अंबे गौरी#दुर्गा आरती#आरती के बोल#देवी पूजा#पूजा विधि

जय अंबे गौरी आरती के पूरे लिखित बोल क्या हैं?

जय अंबे गौरी आरती के लिखित बोल नीचे दिए गए हैं। इन्हें आप सुबह या शाम देवी की पूजा के बाद श्रद्धा से गा या पढ़ सकते हैं। अलग-अलग क्षेत्रों और पुस्तकों में कुछ शब्दों का पाठ-भेद मिलता है, इसलिए आपके घर में प्रचलित रूप भी सम्मान के योग्य है।

जय अंबे गौरी आरती

जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।
तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥

माँग सिंदूर विराजत, टीको मृगमद को।
उज्ज्वल से दोउ नैना, चन्द्रवदन नीको॥

कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजै।
रक्तपुष्प गल माला, कंठन पर साजै॥

केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्पर धारी।
सुर-नर-मुनिजन सेवत, तिनके दुखहारी॥

कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती।
कोटिक चन्द्र दिवाकर, सम राजत ज्योति॥

शुम्भ निशुम्भ विदारे, महिषासुर घाती।
धूम्र विलोचन नैना, निशदिन मदमाती॥

चण्ड-मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे।
मधु-कैटभ दोउ मारे, सुर भयहीन करे॥

ब्रह्माणी रुद्राणी, तुम कमला रानी।
आगम निगम बखानी, तुम शिव पटरानी॥

चौंसठ योगिनी मंगल गावत, नृत्य करत भैरों।
बाजत ताल मृदंगा, अरु बाजत डमरू॥

तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरतार।
भक्तन की दुख हर्ता, सुख सम्पति करता॥

भुजा चार अति शोभित, वर मुद्रा धारी।
मनवांछित फल पावत, सेवत नर नारी॥

कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती।
श्री अम्बे जी की आरती, जो कोई नर गावे॥

कहत शिवानन्द स्वामी, सुख सम्पति पावे॥

जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।
तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥

यहाँ अंबे और अम्बे, दोनों वर्तनी प्रचलित हैं। इसी तरह कुछ पाठों में अंतिम पंक्तियों या कुछ शब्दों में हल्का अंतर मिलता है। आरती गाते समय उच्चारण साफ रखें, लेकिन छोटे पाठ-भेद को लेकर चिंता न करें।

आरती की पंक्तियों का सरल भावार्थ क्या है?

इस आरती में देवी को जगत की माता, शक्ति और करुणा का रूप माना गया है। भक्त देवी के रूप, तेज, आयुध और उनके द्वारा अधर्म के नाश का स्मरण करता है। आरती केवल स्तुति नहीं है; यह अपने भीतर साहस, विनम्रता और सद्भाव जगाने का अवसर भी है।

देवी के रूप और तेज का वर्णन

आरती की आरंभिक पंक्तियों में देवी के मस्तक के सिंदूर, सुन्दर नेत्र, चन्द्रमा जैसे मुख और उज्ज्वल स्वरूप का वर्णन है। स्वर्ण जैसे शरीर, लाल वस्त्र और लाल पुष्पों की माला शक्ति, उत्साह और मंगल का संकेत माने जाते हैं। इन पंक्तियों का पाठ करते समय भक्त देवी के दिव्य रूप का ध्यान करता है।

सिंह को देवी का वाहन और हाथों में खड्ग तथा खप्पर को उनके रक्षक रूप का प्रतीक बताया गया है। इसका भाव यह है कि देवी भय, अन्याय और नकारात्मकता से रक्षा करने वाली शक्ति हैं। देवता, मनुष्य और मुनि उनकी सेवा करते हैं, क्योंकि वे सबके दुख दूर करने वाली माता के रूप में पूजित हैं।

असुर-वध का आध्यात्मिक संकेत

शुम्भ, निशुम्भ, महिषासुर, धूम्रलोचन, चण्ड-मुण्ड, रक्तबीज और मधु-कैटभ जैसे असुरों का उल्लेख देवी की विजय को याद कराता है। इन्हें केवल बाहरी शत्रु के रूप में न देखकर अहंकार, क्रोध, लोभ, भ्रम और भय जैसे भीतर के दोषों के प्रतीक के रूप में भी समझा जा सकता है। आरती पढ़ते समय भक्त अपने मन के इन दोषों को कम करने का संकल्प ले सकता है।

आगे देवी को ब्रह्माणी, रुद्राणी और कमला जैसे नामों से पुकारा गया है। इससे देवी की अनेक शक्तियों का स्मरण होता है। चौंसठ योगिनियों, भैरव, मृदंग और डमरू का उल्लेख पूजा के उत्सवपूर्ण वातावरण को दिखाता है। अंतिम पदों में देवी को माता, पालन करने वाली और भक्तों की पीड़ा हरने वाली कहा गया है।

घर पर जय अंबे गौरी आरती कैसे करें?

घर पर आरती के लिए बड़ी तैयारी जरूरी नहीं है। पूजा का स्थान साफ करें, देवी की तस्वीर या मूर्ति के सामने दीपक रखें और अपनी क्षमता के अनुसार फूल, जल, प्रसाद तथा धूप अर्पित करें। इसके बाद आरती के बोल देखकर शांत मन से गाएं या पढ़ें।

आप यह सरल क्रम अपना सकते हैं:

  1. पूजा का स्थान साफ करके देवी की तस्वीर या मूर्ति के सामने बैठें।
  2. दीपक जलाएं और देवी को फूल, अक्षत या जल अर्पित करें।
  3. कुछ क्षण आंखें बंद करके मन को शांत करें और देवी का ध्यान करें।
  4. जय अंबे गौरी आरती को पूरे ध्यान से गाएं या पढ़ें।
  5. अंत में प्रार्थना करें, प्रसाद अर्पित करें और परिवार के साथ बांटें।

घंटी बजाना, शंख बजाना या कपूर जलाना आपकी परंपरा और सुविधा पर निर्भर है। आरती के समय लौ को सुरक्षित दूरी पर रखें। बच्चों को जलते दीपक या कपूर के पास अकेला न छोड़ें।

क्रम क्या करें ध्यान रखने योग्य बात
1 स्थान और सामग्री तैयार करें सफाई और सरलता को प्राथमिकता दें
2 दीपक और धूप जलाएं आग को सुरक्षित जगह पर रखें
3 देवी का ध्यान करें कुछ क्षण मन को स्थिर करें
4 आरती पढ़ें या गाएं शब्दों को समझकर, जल्दबाजी के बिना पढ़ें
5 प्रार्थना और प्रसाद करें कृतज्ञता के साथ पूजा पूरी करें

सुबह की दैनिक पूजा में आरती जोड़ना चाहते हैं तो घर पर सुबह की पूजा कैसे करें? सरल दैनिक विधि पढ़ सकते हैं। उसमें पूजा का एक सरल क्रम दिया गया है, जिसे अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार बदला जा सकता है।

आरती का सही समय और आवश्यक सामग्री क्या है?

जय अंबे गौरी आरती शाम की पूजा के बाद पढ़ना आम है, लेकिन इसके लिए केवल शाम का समय ही अनिवार्य नहीं है। आप इसे सुबह, नवरात्रि की पूजा, शुक्रवार की देवी-आराधना या घर की नियमित पूजा में भी पढ़ सकते हैं। समय से अधिक जरूरी आपका ध्यान, स्वच्छता और श्रद्धा है।

आरती के लिए सामान्य रूप से ये चीजें पर्याप्त हैं:

  • दीपक और तेल या घी
  • धूप या अगरबत्ती, यदि आप इसका प्रयोग करते हैं
  • फूल और अक्षत
  • जल का छोटा पात्र
  • कपूर, यदि आपकी परंपरा में इसका उपयोग होता है
  • प्रसाद, जैसे फल या घर में बना कोई सात्त्विक भोजन

इनमें से हर वस्तु होना जरूरी नहीं है। केवल दीपक और सच्ची श्रद्धा से भी आरती की जा सकती है। पूजा की सामग्री साधन है; आरती का मुख्य भाव देवी के प्रति सम्मान और अपने मन को शुभ विचारों की ओर मोड़ना है।

पाठ करते समय कौन-सी गलतियाँ न करें?

पहली गलती है कि बोलों को बहुत तेज पढ़ा जाए। आरती गाने की जल्दी में शब्द अस्पष्ट हो जाते हैं और भाव पर ध्यान नहीं रहता। धीमी, साफ और अपनी सहज लय में पढ़ना बेहतर है। यदि कोई पंक्ति कठिन लगे तो उसे पहले अलग से पढ़ लें।

दूसरी गलती पाठ-भेद को लेकर विवाद करना है। अम्बे और अंबे, निशदिन और निसदिन जैसे रूप अलग पुस्तकों में मिल सकते हैं। जिस पाठ का आप नियमित रूप से पालन करते हैं, उसे साफ उच्चारण के साथ पढ़ें। किसी दूसरे परिवार की परंपरा को गलत कहने की जरूरत नहीं है।

तीसरी गलती आरती को केवल मनोकामना पूरी कराने का साधन मान लेना है। प्रार्थना में अपनी जरूरत रखना स्वाभाविक है, पर साथ में विवेक, शक्ति, सेवा और सही आचरण की प्रार्थना भी करें। देवी की स्तुति का एक उद्देश्य अपने व्यवहार को बेहतर बनाना भी है।

चौथी बात सुरक्षा से जुड़ी है। जलते दीपक को कपड़े, कागज और बच्चों से दूर रखें। कपूर जलाने के बाद उसे खुली जगह में रखें और पूजा समाप्त होने पर अग्नि को सुरक्षित रूप से बुझा दें।

लिखित आरती को नियमित पूजा में कैसे साथ रखें?

यदि आपको आरती के बोल रोज पढ़ने के लिए साथ रखने हैं, तो Sanatan Marg पर उपलब्ध भक्ति सामग्री उपयोगी हो सकती है। Sanatan Marg Android ऐप में पाठ को साथ रखकर पढ़ना सुविधाजनक है; इसे Google Play से डाउनलोड कर सकते हैं।

आरती को याद करने के लिए पहले कुछ दिनों तक लिखित पाठ देखकर पढ़ें। फिर हर दिन एक-एक पद पर ध्यान दें और उसका भाव समझें। कुछ समय बाद मुख्य पंक्तियां सहज रूप से याद हो जाएंगी। याद हो जाने के बाद भी कभी-कभी लिखित पाठ देखना उपयोगी है, क्योंकि इससे छूटे हुए शब्दों और पंक्तियों का ध्यान रहता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या जय अंबे गौरी आरती सुबह भी पढ़ सकते हैं?

हाँ, इसे सुबह या शाम पढ़ सकते हैं। घर की परंपरा और आपकी सुविधा के अनुसार समय चुनें; श्रद्धा और ध्यान को समय से अधिक महत्त्व दें।

क्या आरती के लिए दीपक और कपूर दोनों जरूरी हैं?

नहीं, दोनों का होना जरूरी नहीं है। दीपक पर्याप्त है; कपूर का प्रयोग आपकी परंपरा, सुविधा और सुरक्षित व्यवस्था पर निर्भर करता है।

क्या जय अंबे गौरी और जय अम्बे गौरी एक ही आरती हैं?

हाँ, दोनों नाम इसी प्रसिद्ध देवी आरती के लिए बोले जाते हैं। अंबे और अम्बे वर्तनी के अलग रूप हैं, जबकि आरती का मुख्य पाठ वही रहता है।

क्या आरती पढ़ते समय पूरी विधि करना अनिवार्य है?

नहीं, पूरी विधि अनिवार्य नहीं है। स्वच्छ मन से देवी का स्मरण करते हुए आरती पढ़ना पर्याप्त है; सामग्री और क्रम अपनी स्थिति तथा पारिवारिक परंपरा के अनुसार रखें।